वैदिक काल से हमने सूक्ष्मतम काल इकाई त्रुटि से लेकर काल की दीर्घ इकाई कल्प तक हमने वैज्ञानिक रीति से काल विभाजन किया है।
शताब्दियों पूर्व रचित ग्रन्थ श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान सूर्य के विषय में कहा गया है कि सूर्य के रथ का एक चक्र है जिसको सम्वत्सर कहा जाता है। इसकी १२ तीलियाँ 12 मास का प्रतीक हैं।
चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर अपनी विजय के उपलक्ष में एक नए कैलेण्डर की स्थापना की जिसे हम विक्रमी सम्वत के नाम से जानते हैं।
सम्राट विक्रमादित्य ने ईसा पूर्व 57 में इसका प्रचलन आरम्भ कराया था।
इसलिए विक्रमी संवत अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 2023 से 57 वर्ष अधिक 2080 होगा।
हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना चैत्र प्रतिपदा के दिन ही की गयी थी।
भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक दिवस है चैत्र प्रतिपदा।
महाराजा युधिष्ठिर का भी राज्याभिषेक दिवस है चैत्र प्रतिपदा।
नवरात्र स्थापना । शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात्, नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। श्रीराम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
संघ के संस्थापक प.पू. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जयन्ती, आर्यसमाज स्थापना दिवस, सन्त झूलेलाल जन्म दिवस भी है चैत्र प्रतिपदा।
हमारे सभी धार्मिक पर्व, रीति-रिवाज परम्पराएं विक्रमी सम्वत की तिथि के अनुसार ही होते हैं।
पूर्णिमा और अमावस्या पर हम सदियों से पवित्र नदियों में स्नान करते रहे हैं क्योंकि वर्षों पश्चात विशेष स्थिति में पडने वाली पूर्णिमा और अमावस्या का संज्ञान हमारे पूर्वजों को हजारों वर्ष पूर्व था।
जब हिन्दू घर में किसी बालक का जन्म होता है उस समय नक्षत्र, चन्द्रमा की स्थिति से ही उसकी राशि निर्धारित होती है और उसी के अनुसार उसका नामकरण भी होता है।
हमारे यहाँ एक बालक का नाम देखकर बताया जा सकता है कि वह बालक किस नक्षत्र स्थिति में किस माह में जन्मा है। वसंत ऋतु के पर्व पर जब प्रकृति नई अंगड़ाई लेती है, भारतीय नववर्ष भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से उसी काल में मनाया जाता है।




