गाय मानव मात्र के कल्याण के लिए भगवान् का दिया हुआ सबसे उत्तम उपहार है, गाय के द्वारा प्राप्त होने वाले दूध से पौष्टिकता और मूत्र एवं गोबर से औषधिया बनती है.
कुछ वैज्ञानिक शोधों में यह भी पता चला है की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में भी गौ मूत्र के प्रयोग करने से बीमारी को नियंत्रित करने में सफलता मिली है.
एसी बहुपयोगी गौ जो मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा में गाय साथ होती है, सनातन धर्म में गाय की महिमा का वर्णन वेदों और पुराणों एवं महाकाव्यों में मिलता है.
सनातन संस्कृति में गाय के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं हो सकता, हिन्दू संस्कृति में गाय को माता का स्थान प्राप्त है जो अपने आप में सर्वोच्च है.
परतंत्रता के कालखंड में मुगलों और अंग्रेजों ने सनातनियों को कष्ट पहुँचाने के उद्देश्य से गाय को काटना और मारना शुरू कर दिया एवं अपने कुटनीतिक चालों से गाय के प्रति लोगों में अनास्था का भाव पैदा करने के लिए उसे एक पशु के रूप में परिभाषित किया.
उनके इस दुष्कृत्य को आजाद भारत की सरकारों ने भी आगे बढाया और गाय प्रति उपेक्षा का भाव प्रदर्शित किया लेकिन अब समय बदल चूका है.
वर्तमान की सनातनी सरकारों ने इसके लिए गंभीर प्रयास किये है ऐसे ही एक प्रयास गो-संरक्षण के लिए समर्पित उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों को खेती के साथ गोपालन के लिए प्रेरित कर रही है।
आठ लीटर तक दूध देने वाली गाय का पालन करने वाले पशुपालक को 10 हजार रुपये, जबकि आठ लीटर से अधिक दूध देने वाली गाय का पालन करने वालों को 15 हजार रुपये अनुदान दिया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में बरेली मंडल के चारों जिलों में योजना लागू की गई है। बरेली में 45 पशुपालकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य मिला है। अब तक 55 लोगों ने आवेदन किया है, सत्यापन कर 40 लोगों का चयन कर लिया गया है।
बदायूं में 54 पशुपालकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य मिला है
शाहजहांपुर में 45 पशुपालकों के चयन का लक्ष्य आवंटित हुआ है। पीलीभीत में 21 पशुपालकों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य मिला है।





